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Padma Bhushan Pandit Rajan Mishra Ji left for Heavenly Abode

If we sing considering that the Raag is much bigger than us, then the Raag itself shows us the way to sing...

Written by Prateeksha Patari · 1 min read >

If we sing considering that the Raag is much bigger than us, then the Raag itself shows us the way to sing it.

Classical singer Pt. Rajan Mishra suffering from Covid-19, says goodbye to the world on Sunday evening. He was admitted to St. Stephens Hospital in Delhi on Sunday in critical condition, where his condition continued to remain critical due to some heart problems. Pandit Sajan Mishra informed with a sore throat on his mobile phone – ‘Brother no more’. This news has given a big shock to the people associated with the world of art & music as the pair of classical music has comforted millions of hearts with their singing for decades.

With the death of Pt. Rajan Mishra, the evergreen duo called Rajan-Sajan Mishra also lost the title. Renowned vocalists in the khyal style of Indian classical singing, the brothers have been honored with the greatest achievements like Padma Bhushan, Sangeet Natak Academy Award, and many more. Belonging to the Benaras Gharana, Pandit Rajan Mishra, along with brother Sajan Mishra have performed for both Indian and global audiences for decades now. Born in 1951, and brought up in Varanasi. Along with his brother, he received his musical training under his father Hanuman Prasad Mishra, their grandfather’s brother Bade Ram Das Ji Mishra, and their uncle, sarangi virtuoso, Gopal Prasad Mishra.

The death of Pandit Rajan Mishra Ji, who left his indelible mark in the world of classical singing, is very sad. As, a life so beautifully lived deserves to be beautifully remembered, in loving memory of Pt. Rajan Mishra, we pay gratitude to his contribution to Indian Classical Music and pray for his rest in peace. Om Shanti.


From Anonymous

“हे गोविंद रखो शरण…. अब तो जीवन हारा रे…….”

शायद गंधर्व लोक में संगीत की बैठक हुई है। और वहाँ अच्छे कलाकर कम पड़ गए। इसी लिए बनारस घराने को ही बुला लिया।

( दुःखद। दो हंसो का जोड़ा बिछड़ गया।)

पंडित जी अब किस से सुनेंगे
“धन्य भाग सेवा का अवसर पाया…”
आप हम बच्चो के प्रेरक थे। अब काह करे कछु समझ नाही आवत है पंडित जी। बहुत दुःख है आपके जाने का।

भारतीय शास्त्रीय संगीत में कंठ गायन के पर्याय पं. राजन साजन मिश्र संगीत कार्यक्रमों में श्रोताओं को दो रचनाएं जरूर सुनाते।
एक- ‘धन्य भाग सेवा का अवसर पाया…और दूसरी पं. भीमसेन जोशी की प्रिय रचना ‘जो भजे हरि को सदा…।

इससे जब दोनों भाइयों को अपने लिए कुछ गाने, गुनगुनाने का मन करता, खासतौर से रियाज के समय तो उनकी पसंदीदा रचना ‘हे गोविंद रखो शरण अब तो जीवन हारा रे…’ होती।

कोरोना से ग्रसित होने के बाद दिल्ली स्थित अपने आवास से 23 अप्रैल को वह अस्पताल गए। उससे पहले 22 अप्रैल की रात पं. राजन मिश्र ने अनुज पं. साजन मिश्र से कहा- ‘पता नाहीं, अब हम लोग एक साथ कभी गा पाइब कि नाहीं अस्पताल ले जाए से पहिले तू हमके हम लोगन वाला भजन सुना दा।

पं. राजन मिश्र यह कहते हुए और पं. साजन मिश्र यह सुनते हुए एक-साथ रो पड़े थे। (मेरे ये सोचने मात्र ही आँख से आंसू छलक उठा)

अगली पीढ़ी के प्रतिनिधि रीतेश रजनीश भी यह दृश्य देख अपने आंसू रोक नहीं पाए थे। पं. साजन मिश्र भले ही स्वयं अंदर से डरे हुए थे लेकिन अपने बड़े भाई को आश्वस्त करते हुए कहा – ‘हम लोग जरूर साथ में गाइब तोहार आदेश ही ‘तब हम भजन सुनावत हई।’ इतना कहने के बाद ‘हे गोविंद रखो शरण अब तो जीवन हारा रे…’ भजन किसी तरह गाना शुरू किया।

पं. राजन मिश्र के कंठ से आराधना के स्वर और आंखों से आंसू एक साथ फूट रहे थे। पं. साजन मिश्र गा कम रहे थे, रो अधिक रहे थे।

बिस्तर पर लेटे लेटे पं. राजन मिश्र भी सुर में सुर मिलाने की चेष्टा कर रहे थे। अत्यधिक कमजोरी और सीने में जकड़न के कारण वह पूरी पंक्ति तो अपने अनुज के साथ नहीं गा सके लेकिन इतना उनके मुख से जरूर निकला ‘… अब तो जीवन हारा रे’।

जैसे उन्हें आभास हो गया था कि अब संगीत और संसार से उनका नाता टूटने वाला है। डरावने भविष्य की आहट उन्हें अस्पताल जाने से पहले ही मिल गई थी। 25 अप्रैल की शाम करीब साढ़े छह बजे दिल्ली के सेंट स्टीफंस अस्पताल में अपने बड़े भाई के निधन की सूचना पाते ही पं. साजन मिश्र यह कहते हुए फफक पड़े- ‘…सच में जीवन हारा रे“।

Written by Prateeksha Patari
I am a music graduate and food technology student from Delhi University. I Love classical music from the bottom of my heart. Profile

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